Debenture डिबेंचर क्या होता है
डिबेंचर का हिंदी अर्थ होता है ऋण पत्र तथा इन्हें शेयर मार्केट की भाषा में गोंड भी कहा जाता है एडवेंचर किसी कंपनी द्वारा ऋण स्वीकार किए जाने का एक प्रमाण पत्र आप मान सकते हैं यह इस प्रकार है जैसे कोई भी कंपनी मार्केट से ऋण लेना चाहती है तो उसके कई तरीके हैं उनमें से ही यह एक तरीका है कि कंपनी ऋण पत्र निकालती है यह पेपर है इस पर कंपनी यह बताती है कि हम इस इंटरेस्ट रेट पर आपसे लेना चाह रहे हैं आपको हम इतने पैसे पर कितना ब्याज देंगे और इतने समय में इस ब्याज को झुका दिया जाएगा
इसे आप सीधे-सीधे ऐसे समझ सकते हैं जैसे आप गांव में किसी भी व्यक्ति को ऋण देते हैं और उससे स्टांप पेपर पर साइन करवा लेते हैं कि वह इतने समय में इस को वापस कर देगा और उस पर कितनी ब्याज देगा तो वह स्टांप पेपर ऋण पत्र हो गया
किसी कंपनी को अगर कोई दीर्घकालीन ऋण लेना है तो उसके लिए ऋण पत्र निकालना सबसे प्रचलित बिजी है इस ऋण पत्र पर कर्जे की राशि ब्याज दर भुगतान की अवधि आदि सभी शर्तें लिखी रहती हैं
आजकल यही ऋण पत्र इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर्मेट में भी आने लग गए हैं जो सिर्फ ऋण पत्र का इलेक्ट्रॉनिक रूप है और कुछ नहीं
डिबेंचर और शेयर में अंतर
रण पत्र धारक जो भी व्यक्ति है वह कंपनी के लेनदार होते हैं जगत शेयरधारक कंपनी में हिस्सेदार होते हैं और कंपनी में स्वामित्व का अधिकार रखते हैं इसलिए ऋण पत्र धारक यानी डिबेंचर धारक को कंपनी में किसी भी निर्णय में वोट देने का अधिकार नहीं होता डिबेंचर पर एक फिक्स रेट पर इंटरेस्ट रेट दिया जाता है जबकि शेयर पर लाभांश दिया जाता है इस प्रकार शेयरधारक कंपनी को होने वाले लाभ पर निर्भर रहते हैं जबकि ऋण पत्र धारक को इस से कोई मतलब नहीं होता उसे अपने ऋण पत्र पर ब्याज मिलना ही होता है ऋण पत्र पर ब्याज निश्चित होती है जबकि शेयरधारक को मिलने वाला लाभ अनिश्चित होता है वह कम या ज्यादा भी हो सकता है और नहीं भी मिल सकता है कंपनी किसी भी स्थिति में ऋण पत्र पर ब्याज का भुगतान और उसकी राशि का भुगतान रोक नहीं सकती चाहे उसे कहीं और से लड़ लेना पड़े या अपनी प्रॉपर्टी प्रतिभूतियों को बेचना पड़े जबकि शेयरधारक के केस में ऐसा नहीं है कंपनी अगर घाटे में जाती है तो शेयरधारक भी घाटे में चले जाते हैं
डिबेंचर्स के प्रकार
एडवेंचर यानी शेयर कई प्रकार के होते हैं जिनमें से कुछ का विवरण निम्नलिखित है
1. Redeemable debentures अर्थात विमोचन सील पत्र -- यह वह ऋण पत्र है जिनका भुगतान एक निश्चित अवधि के बाद कर दिया जाता है या कोई सूचना देने के पश्चात कर दिया जाता है इनवेस्टर को ऐसे डिबेंचर्स का भुगतान एक समय के बाद प्राप्त हो जाता है
2. Irredeemable debentures अविमोचन शील ऋण पत्र- - यह वह ऋण पत्र है जिन पर केवल ब्याज का भुगतान किया जाता है इनकी राशि का भुगतान कभी भी नहीं किया जाता अर्थात कंपनी के जीवनकाल में इनका भुगतान नहीं हो सकता इन्हें स्थाई ऋण पत्र भी कहते हैं इनके पैसे का भुगतान सिर्फ तभी होता है जब या तो कंपनी खत्म कर दी जाए या कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया जाए
3. Secured debentures बंधक ऋण पत्र - ऐसे ऋण पत्र जिन्हें कंपनी अपनी संपत्तियों को बंधक बनाकर निर्गमित करती है अर्था तहसील पत्र कंपनी की संपत्ति पर बाहर या बंद करके निर्गमित किए जाते हैं यदि कंपनी एंड डिबेंचर्स पर रेगुलर ब्याज नहीं दे पाती या कंपनी का समापन होता है तब इन बंधक संपत्तियों को बेचकर ऐसे डिबेंचर्स का ब्याज सहित भुगतान करना पड़ता है
4. Unsecured debentures साधारण ऋण पत्र
- यह ऐसे रोड पत्र हैं जिनके बदले कंपनी कोई सिक्योरिटी नहीं देती है इनके लिए कोई प्रतिभूति गिरवी नहीं रखी जाती है ऐसे लिया होता है और रेट और ब्याज के भुगतान के लिए उनको कोई गारंटी नहीं दी जाती है ऐसे ऋण पत्रों के धारक कंपनी के साधारण लेनदार होते हैं और कंपनी के समापन या दिवालिया घोषित होने की स्थिति में इनको पैसा बाद में दिया जाता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती है
5. Convertible debentures परिवर्तित ऋण पत्र
- - यह डिवाइस जब कंपनी निर्गमित करती है तो वह डिबेंचर धारकों को यह विकल्प देती है कि वे एक निश्चित अवधि के बाद अपने डिबेंचर्स को कंपनी के शेयर में परिवर्तित कर सकते हैं जब डिबेंचर को पूरी तरह शेयर में परिवर्तित कर दिया जाता है तब इन्हें पूर्ण तरह परिवर्तित ऋण पत्र अर्थात fully कन्वर्टिबल डिबेंचर कहां जाता है लेकिन अगर ऐसे डिबेंचर का सिर्फ एक हिस्सा ही शेयर में परिवर्तित किया जाता है तब इन्हें आंशिक परिवर्तित ऋण पत्र या partly कन्वर्टिबल एडवेंचर कहा जाता है
6. Non convertible debentures अपरिवर्तित ऋण पत्र- - जब ऋण पत्रों को जारी करते समय कंपनी इन्हें शेयर में परिवर्तित करने का विकल्प नहीं देती है तब ऐसे ऋण पत्र को अपरिवर्तित ऋण पत्र कहा जाता है
7. Registered debenture पंजीकृत ऋण पत्र इस प्रकार के ऋण पत्र का विवरण कंपनी के खातों में भी दर्द होता है और इनका मूलधन और ब्याज आदि का भुगतान खाता धारक को ही किया जा सकता है तथा इनका हस्तांतरण अगर करना है तो वह नियम के अनुसार होता है
8. Zero interest debentures ब्याज रहित ऋण पत्र इस प्रकार के डिबेंचर्स पर कोई भी ब्याज नहीं दिया जाता है तथा बहुत ही कम प्रीमियम पर शेर परिवर्तन की सुविधा दे दी जाती है इन्हें बांड भी कहते हैं
9. बांड Bond - सरकार या सरकारी कंपनियों द्वारा जनता से जबरन प्राप्त करने के लिए जो ऋण पत्र जारी किए जाते हैं उन्हें बांड कहा जाता है
10 . आंशिक परिवर्तन ऋण पत्र partly convertible debentures इस प्रकार के ऋण पत्रों का कुछ भाग ही शेरों में परिवर्तित किया जाता है तथा शेष भाग अपरिवर्तित रहता है जिससे मार्केट की भाषा में खोखा कहा जाता है अधिकतर कंपनियां इस प्रकार के ऋण पत्रों में खोखा भाग को किसी अधिकृत बैंक को नियुक्त कर प्रस्तावित मूल्य से थोड़े कम मूल्य पर तुरंत खरीदवा देती हैं जिसे खोखा बाई बैक ने कहा जाता है
आंशिक परिवर्तन शीघ्र पत्र के बारे में ऊपर भी जानकारी दी गई है
इसके अलावा और भी ऋण पत्रों के कई प्रकार हो सकते हैं जो अलग-अलग आधार पर बांटे गए हो सकते हैं मेरी जानकारी के अनुसार मैंने आपको इतना बताने की कोशिश की है जितना मुझे पता है
डिबेंचर जारी करने में कंपनी को क्या फायदा है
कंपनी जो ऋण पत्र जारी करती हैं वह ऋण लेने के लिए ही जारी करती हैं अर्थात वह कंपनी पर एक रेड हो जाता है और ऋण पत्र जारी कर जो कंपनी पैसा जुटाती है वह उसके लिए एक अतिरिक्त कार्यशील पूंजी का कार्य करता है अर्थात जब कंपनी को और अधिक पैसे की जरूरत होती है तो वह ऋण पत्र जारी कर उस पर पैसा उठा लेती है
यह बिल्कुल उसी तरह से है जैसे अगर हमें पैसे की जरूरत है तो हम किसी भी आदमी से पैसे लें और उसके बदले उसे किसी स्टांप पेपर पर लिख कर दे दें कि हम उसे यह पैसे कितने दिन में वापस कर देंगे और जिसके ऊपर हम इतने दिन का इंटरेस्ट रेट इस दर से देंगे
कंपनियां और भी कई तरीके से ऋण प्राप्त सकती हैं लेकिन उन्हें ऋण पत्र जारी करके ऋण लेने से कुछ फायदे भी हैं जैसे अगर कंपनी पत्र जारी कर जो रोज उठाती है उस पर कंपनी जो ब्याज अदा करती है वह ब्याज आय कर मुक्त होती है साथ ही यह ब्याज कंपनी के लिए उसके खर्चे में शामिल की जाती है तो आयकर निर्धारित करते समय यह दिया गया ब्याज इनकम में शामिल ही नहीं होता इससे कंपनी की इनकम कम दिखाई जाती है जबक इक्विटी शेयर्स को कंपनी जो डिविडेंड देती है उसके पहले कंपनी को उस पूरी-पूरी को अपनी आय में शामिल करना पड़ता है और उस पर कंपनी टैक्स देती है उसके बाद जो पैसा बचता है उसे डिविडेंड में दिया जाता है इस तरह से कंपनी को डिबेंचर जारी करने में शेयर की तुलना में कुछ फायदा भी हो सकता है
डिबेंचर्स पर जो ब्याज दी जाती है वह पूर्व निर्धारित होती है साथ ही इन पर दी जाने वाली ब्याज सरकार द्वारा लगभग निश्चित कर दी जाती है साथ ही कंपनियों द्वारा कन्वर्टिबल डिबेंचर और नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर्स पर अलग-अलग ब्याज दी जाती है और सामान्यतया कंपनियां बैंक की तुलना में डिबेंचर पर कम ब्याज देती हैं जैसे सामान्यतया कंपनियां डिबेंचर्स पर 12 पर्सेंट के आसपास ब्याज देती हैं जबक अगर कंपनियां मार्केट से या बैंक से लोन लेते हैं तो कंपनियों को कभी-कभी 17पर्सेंट तक भी ब्याज देना पड़ता है तो इस प्रकार यह ब्याज दर कंपनी के लिए किसी बैंक आदि से लोन लेने से कुछ कम ही पड़ता है
जब कंपनी किसी बैंक निगम से लोन लेती है तो उसकी किस्त बन जाती है जो उसे हर महीने चुकानी होती है और यह किस थोड़े दिनों बाद ही शुरू हो जाती है जिसमें कुछ पैसा ब्याज का और कुछ मूलधन का हर महीने उसे देना होता है जबकि वेंचर जारी करने में कंपनी को यह फायदा होता है कि कंपनी से 3 साल या 5 साल या 7 साल जैसी लंबी अवधि के लिए जारी करती है और उसे इस पैसे का भुगतान इतने लंबे समय के बाद करना होता है तो कंपनी को एक लंबा समय मिल जाता है उस पूंजी से अपना कार्य करने में आसानी होती है
कंपनियां डिबेंचर्स का पूर्ण भुगतान कर देती हैं तो उसके बाद उसके दायित्व से मुक्त हो जाती हैं जब अगर कंपनी इक्विटी शेयर जारी करती है तो उसकी रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी उसका दायित्व कंपनी के ऊपर हमेशा बना ही रहता है जब भी कंपनी को कोई भी निर्णय लेना है तो उसमें वोटिंग राइट्स भी देना पड़ता है और कोई भी लाभ होने पर उसका डिविडेंड हमेशा पे करना पड़ता है
कन्वर्टिबल डिबेंचर्स खरीदने के फायदे
आजकल कन्वर्टिबल डिबेंचर्स में लोग बहुत अधिक इन्वेस्टमेंट करते हैं कन्वर्टिबल डिबेंचर्स में इन्वेस्टमेंट करने का कुछ फायदे भी होते हैं जैसे जब आप डिबेंचर्स खरीद लेते हैं उसकी एक निश्चित अवधि के बाद आप उनको कंपनी के शेयर समय परिवर्तित कर सकते हैं यह परिवर्तन कभी पूर्ण रूप में और कभी आंशिक रूप से किया जाता है इसकी शर्तें कंपनी जब डिबेंचर्स जारी करती है तब पहले ही बता देती है या उसके बाद में विकल्प दे देती है
कन्वर्टिबल डिबेंचर्स पर कंपनी जनरल 12पर्सेंट से 15 पर्सेंट के बीच में ब्याज देती हैं और अधिकांश कंपनियां इन डिबेंचर्स को शेयर में परिवर्तित करने की डेट पहले से ही फिक्स रखती हैं या फिर 6 महीने से लेकर 3 साल के बीच में कोई समय निर्धारित करती हैं जब इन को परिवर्तित किया जा सकता है या फिर अगर कंपनी आंशिक रूप से ही इनका परिवर्तन करवाती है तब वह तीन चार बार में धीरे-धीरे इनको शेयर्स में कन्वर्ट करवा देती है
परिवर्तित ऋण पत्र का शेयर में जो परिवर्तन किया जाता है उस की दर पहले से निर्धारित होती है और प्राय ऐसा पाया जाता है कि जब परिवर्तन करने का समय आता है तब तक उस शेयर की कीमतें बढ़ चुकी होती हैं तो निवेश करने वाले को तो वह शेयर उसी पुरानी रेट पर मिलता है जिससे उसे फायदा हो जाता है
परिवर्तित ऋण पत्र में निवेश एक बहुत ही अच्छा निवेश माना जाता है इसमें लाभ भी अच्छा होता है साथ ही इसमें जोखिम भी कम है ऋण पत्र सुरक्षित होते हैं इन पर ब्याज दर निश्चित होती है और ब्याज मिलती रहती है साथ ही बाद में इन्हें अपनी इच्छा से शेयर में कन्वर्ट करने का ऑप्शन भी मिलता है तब शेयर के वर्तमान मूल्य और परिवर्तन करने वाले मूल्य में जो अंतर होता है उस कीमत का फायदा भी ऋण पत्र पर अच्छा मिल जाता है
परिवर्तित ऋण पत्र यानी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स अपरिवर्तित ऋण पत्र की तुलना में भी अधिक लाभप्रद होते हैं परिवर्तित ऋण पत्र को कभी-कभी अच्छे खासे प्रीमियम पर बेचा भी जा सकता है क्योंकि इनसे मिलने वाले शेयर की कीमत तब तक काफी बढ़ चुकी होती हैं
अगर कोई कंपनी अपनी विस्तार की योजना बना रही है या कोई ऐसी कंपनी है जो ग्राउंड पर कुछ भी उत्पादन नहीं कर रही है लेकिन उसे पैसा जुटाना है तब वह शेयर भी निकालती है और डिबेंचर्स भी निकालती है तब ऐसी कंपनी में डिबेंचर्स लेने का फायदा अधिक होता है क्योंकि जब तक कंपनी कुछ भी उत्पादन नहीं कर रही है तब तक डिबेंचर्स पर ब्याज मिलता रहेगा और उसके बाद कन्वर्टिबल डिबेंचर्स को जब कंपनी उत्पादन करने लगे तब शहर में बदला जा सकेगा लेकिन जो लोग उस कंपनी के शेयर खरीदेंगे उनके लिए यह नुकसान होगा कि अगर कंपनी कोई उत्पादन नहीं कर रही है तब उसको कोई लाभ नहीं हो रहा होगा ऐसी स्थिति में हो सकता है कि उनको कोई डिविडेंड न मिले और यह भी हो सकता है किस शेयर में कोई उछाल कम ही आए
अगर कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब है या मार्केट की स्थिति खराब है या देश की ही अर्थव्यवस्था ख़राब है या आप कंपनी के भविष्य के बिजनेस का अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं कि है कंपनी आग एक ऐसा कुछ करेंगी तब ऐसी कंपनी डिबेंचर्स लेने में अधिक फायदा होता है क्योंकि डिबेंचर पर तो कंफर्म ब्याज मिलता है और शेयर के बारे में क्या पता वह आगे बढ़े या घटे
शेयर बाजार अगर मार्केट में अपनी पीठ पर पहुंच गया है या उच्चतम स्थिति में पहुंच गया है तब वहां से मार्केट के गिरने की एक बड़ी संभावना बन जाती है क्योंकि शेयर मार्केट तो गिरता बढ़ता रहता है ऐसी स्थिति में किसी कंपनी के शेयर की बजाए उसके डिबेंचर में फायदा होने की गुंजाइश अधिक होती है क्योंकि शेयर के दाम उच्चतम पर पहुंचने के बाद गिर सकते हैं लेकिन डिबेंचर में तो ब्याज फिक्स है वह आपको मिलता ही रहेगा और जब शेयर के दाम कम हो जाए तब उन्हीं डिबेंचर को आप शेयर में बदल सकते हैं
इस प्रकार कन्वर्टिबल डिबेंचर्स एक अच्छा फायदे का सौदा होते हैं क्योंकि इनमें जोखिम की मात्रा कम रह जाती है और आगे चलकर लाभ हो सकता है
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