कंपनी के व्यवसाय पर देश के राजनीतिक और आर्थिक माहौल का प्रभाव
हमारे देश में जब भी कोई सरकार बदलती है तो शेयर मार्केट में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव आते हैं आम व्यक्ति की समझ में नहीं आता कि सरकार बदलने से किसी कंपनी के व्यवसाय पर क्या प्रभाव पड़ता है और उस के शेयरों में इतना उतार-चढ़ाव क्यों होता है
इसके साथ ही देश में जब कोई भी आर्थिक माहौल में परिवर्तन आता है जैसे आरबीआई जब भी कोई रेट कम या ज्यादा करती है तब भी शेयर मार्केट में उतार चढ़ाव बहुत अधिक आते हैं
देश के राजनीतिक आर्थिक परिस्थितियों का किसी कंपनी के व्यवसाय पर बहुत अधिक प्रभाव होता है जिसमें से कुछ मुख्य परिस्थितियां व्यक्तित्व जिनका हम नीचे विश्लेषण करेंगे
1. केंद्रीय बजट -- जब भी सरकार का केंद्रीय बजट आना होता है उससे पहले शेयर मार्केट में बहुत ही ज्यादा उतार-चढ़ाव आते हैं क्योंकि हमारे देश में केंद्रीय बजट सीक्रेट रखा जाता है और इसका खुलासा सिर्फ बजट वाले दिन ही होता है कि उसमें क्या नीतियां बन रही है किस टैक्स में कितना उतार-चढ़ाव होना है लेकिन बजट से पहले कुछ कुछ खबरें आने लगती हैं जो नेताओं के भाषणों से या कुछ कर्मचारियों की बाहर खबरों को लिख कर देने से जो खबरें आ जाती हैं उन के आधार पर ही शेयर मार्केट में बहुत बड़ा उतार-चढ़ाव हो जाता है
केंद्रीय बजट में सरकार हर वर्ष एक्साइज ड्यूटी कस्टम ड्यूटी विदेशों से व्यापार के आर्थिक नियमों में परिवर्तन आयात निर्यात के नियमों में परिवर्तन करती है जो कि किसी भी कंपनी या व्यवसाय को तुरंत प्रभावित करते हैं जैसे सरकार अगर आयात किसी वस्तु पर कम कर देती है तो उस वस्तु की कीमत देश में सस्ती हो जाएगी इससे देश में अगर वह चीज किसी कंपनी के द्वारा बनाई जा रही है तो उसके व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव तुरंत दिखाई देने लगेगा और उसके सिर के नीचे आने की संभावना तुरंत बन जाती है
किसी सेक्टर में उसके उत्पाद पर टैक्स की दर बढ़ाने या घटाने का कंपनी के व्यवसाय पर तुरंत प्रभाव पड़ता है अगर कंपनी के उत्पाद पर टैक्स की दर बढ़ा दी जाती है तो उस कंपनी के उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है जिससे मार्केट में पहले से उपस्थित नकली उत्पादों की कीमत कम हो जाती है क्योंकि नकली सामान बनाने वाली कंपनियों को टैक्स नहीं देना होता है इससे कंपनी के व्यवसाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है जो उसके शेयर को नीचे ला सकता है
इसी प्रकार जब किसी ब्रांडेड प्रोडक्ट पर टैक्स दर कम की जाती है तो उसकी कीमत बाजार में उपलब्ध नकली सामानों की कीमत के लगभग बराबर आ जाती है तब उपभोक्ता ब्रांडेड प्रोडक्ट की तरफ अधिक मुड़ जाता है और नकली कंपनियों के सामानों को नहीं खरीद ता जिससे कंपनी का व्यवसाय बढ़ने लगता है तो कंपनी के शेयर में बढ़त की गुंजाइश हो जाती है
इस प्रकार हम देखते हैं कि केंद्रीय बजट का किसी भी कंपनी के व्यवसाय पर या राष्ट्र में होने वाले अलग-अलग व्यवसाय ऊपर बहुत अधिक प्रभाव होता है अतः बजट आने से पहले और बजट आने के बाद विभिन्न कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव की गुंजाइश बनी रहती है इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशक और बड़े निवेशक बजट आने से पहले अपने पैसे को निकाल लेते हैं और जब बजट में सब कुछ साफ साफ स्पष्ट हो जाता है उसके बाद वह कंपनियों में पैसा लगाते हैं इस वजह से मार्केट में बजट के समय उतार-चढ़ाव अधिक होता है
इसी प्रकार सरकार केंद्रीय बजट में किस मद में कितना खर्च करती है इस चीज से भी बहुत ज्यादा फर्क आता है जैसे कि सातवें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में बहुत कम वृद्धि की गई जबकि कंपनियों द्वारा यह वृद्धि सो प्रतिशत तक अनुमानित थी लेकिन उस अनुपात में वृद्धि नहीं हुई बजट आने से पहले कंपनियों का अनुमान था कि रियल एस्टेट में इस बजट के आने के तुरंत बाद एक लंबी वृद्धि आएगी साथ ही अगर रियल इस्टेट क्षेत्र में वृद्धि आएगी और वेतन बढ़ते हैं तो उसके साथ ही बैंकों की लोन ग्रोथ भी बढ़ेगी इसके अलावा फोर व्हीलर मार्केट में वृद्धि आने की पूरी संभावना थी तो इस प्रकार इन कंपनियों ने अपने एक्स पेंशन प्लान बहुत बड़े-बड़े बना रखे थे और बड़े-बड़े कर्जे लेकर उन्होंने अपने व्यवसाय को फैला रखा था लेकिन जब वेतन आयोग में वेतन उस अनुपात में नहीं बढ़ा तो इन कंपनियों के एक्सपेंशन प्लान पर पानी फिर गया रियल एस्टेट में बुरी तरह से मंदी छा गई और फोर व्हीलर मार्केट में भी उस अनुपात में वृद्धि होने की संभावना खत्म हो गई जो बड़ी-बड़ी कंपनियों ने अनुमान लगा रखा था
2. सरकारी योजनाओं का प्रभाव -- केंद्र सरकार द्वारा बनाई जाने वाली योजनाएं कंपनियों के व्यवसाय को कई तरह से प्रभावित करती हैं जो कंपनियां सरकारी योजनाओं से सीधे-सीधे जुड़ी होती हैं उनके व्यवसाय पर सरकार के द्वारा बनाई जाने वाली योजना और सरकार द्वारा उस योजना में किए जाने वाले खर्च से सीधे सीधे फर्क आता है जैसे जो कंपनियां सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर बांध पुल नहर सड़क हाथ बनाने से जुड़ी हुई हैं अगर सरकार इस क्षेत्र में ज्यादा खर्च करती है तो इन कंपनियों को काम मिलता है जिससे इन कंपनियों के व्यवसाय में प्रसार होता है साथ ही अगर इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार ज्यादा खर्च करती है तो इस में प्रयोग होने वाला सीमेंट लोहा Koyla आज के व्यवसाय और कीमतों में भी फर्क आता है यह इससे जुड़ी हुई कंपनियों के व्यवसाय में भी फर्क पड़ता है
इसी तरह सरकार अगर कोई सामाजिक योजना लेकर आती है तो उससे जुड़ी हुई कंपनियां उसे तुरंत प्रभावित होती हैं जैसे अभी हाल ही में सरकार स्वच्छ भारत योजना लेकर आई तो स्वच्छ भारत अभियान के लिए जरूरी सामान में सैनिटेशन इक्विपमेंट्स की अधिक आवश्यकता पड़ गई तब इससे जुड़ी हुई कंपनियों के शेयरों में काफी तीव्रता से वृद्धि हुई जैसे एक कंपनी है सिंटेक्स जोके इस क्षेत्र से जुड़े हुए इक्विपमेंट बनाती है उसको सरकार के स्वच्छ भारत अभियान योजना से काफी कुछ लाभ होने की संभावना बताई गई थी क्योंकि वह इस क्षेत्र की बड़ी कंपनी है
सरकार ने स्किल डेवलपमेंट योजना शुरू कर रखी है जिसमें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना उसके नाम से बहुत सारी योजनाएं लागू कर रखी हैं इस योजना के माध्यम से सरकार जनता में एक बहुत अधिक पैसा खर्च करती है जिससे कुशल कर्मचारी प्राप्त हो सके तो यह जिन क्षेत्रों में सरकार पैसा खर्च कर रही है वह उस क्षेत्र के कर्मचारी सरकार को फ्री में मिल रहे हैं या बड़ी कंपनियों को कुशल कर्मचारी मिल रहे हैं तो इससे कंपनियों का फायदा होता है साथ ही सामाजिक फायदे भी होते हैं जिसका देश के संपूर्ण व्यवसाय पर बड़ा फर्क आ सकता है
3. प्रशासन की सख्ती का असर - जब भी कोई सरकार बदलती है तो उसके आधार पर ही यह अनुमान लगाया जाता है कि प्रशासन किस तरह का होगा या शीर्ष पर बैठे नेता के आधार पर लोगों का अनुमान होता है कि प्रशासन किस तरह से होगा जैसे अभी तत्कालीन सरकार आने पर लोगों में यह अनुमान लग चुका था कि प्रशासन शक्ति से काम करेगा इस चीज का भी कंपनियों के व्यवसाय पर भारी फर्क पड़ता है क्योंकि कंपनियों में बहुत सारा पैसा ब्लैक मनी लगा होता है जो कंपनियां ब्लैक मनी से कार्य करती हैं और नई सरकार अगर ब्लैक मनी पर शिकंजा कसती है तो इन कंपनियों के कार्यालय पर और व्यवसाय पर तुरंत फरका ता है इसी प्रकार अगर किसी कंपनी ने बहुत सारा फर्जी तरीके से लोन ले रखा है और वह कंपनी लोन भी चुका नहीं रही है और पैसा हड़प कर के बैठी है नई सरकार ने अगर इस लोन चुकाने के लिए शक्ति कर दी तो इस कंपनी को अपने एसेट्स बेचने पढ़ते हैं इससे कंपनी के व्यवसाय पर बहुत सारा फरका ता है और उसके शेयर में उतार चढ़ाव की गुंजाइश बन जाती है
हमारे देश में एक और बड़ी समस्या है कि बड़ी बड़ी कंपनियां राजनीतिक दलों को चंदा देकर अपने गलत काम करवाती हैं तब किस व्यवसायिक समूह की किस राजनीतिक दल के साथ अच्छी सांठगांठ है इस चीज का भी बहुत प्रभाव पड़ता है बड़े व्यावसायिक समूह या बड़ी कंपनियां इन दलों की सरकारों में परिवर्तन भी करवा देते हैं इनके प्रचार प्रसार में वह बहुत अधिक पैसा खर्च करते हैं जब उनके मासिक दल की सरकार आ जाती है तब उनको इललीगल फायदे भी मिलते हैं इस चीज का भी कंपनी के शेयरों पर प्रभाव आता है
इसका एक उदाहरण अभी देखने को मिला है जैसे रूइया ब्रदर्स पर बहुत सारा कर्जा था और उनका 80% कर्जा एनपीए हो चुका था जिसे वह या तो चुका नहीं रहे थे या चुका नहीं पा रहे थे लेकिन सरकार ने जब दबाव बनाया तो उन्हें अपनी एक तेल से जुड़ी हुई कंपनी रूस की कंपनी को बेचनी पड़ी जिससे रूइया ब्रदर्स की संपत्ति 1 साल में ही आधी रह गई यह प्रशासन की सख्ती का सबसे बड़ा उदाहरण है
इसके अलावा अभी हाल ही में दो लोन डिफॉल्टर्स विजय माल्या और नीरव मोदी का उदाहरण है जो सरकार की सख्ती के कारण देश छोड़कर भागना पड़ा और उनका व्यवसाय पूरी तरह से खत्म हो गया जिससे यह कंपनियां धरातल पर आ चुकी हैं और इनके शेरों की कीमत भी जमीन पर आ चुकी है
4. मानसून और कृषि का प्रभाव -- हमारे देश में कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर बहुत बड़ी जनसंख्या निर्भर करती है साथ ही यह जनसंख्या जो कृषि से उत्पादित करती है उससे ही वह बाजार में पैसा खर्च करती है लेकिन कृषि इतना बड़ा क्षेत्र होते हुए भी आज भी मानसून पर निर्भर है अगर किसी वर्ष मानसून खराब रहता है तो बहुत सारी फसलों में उत्पादन गिर जाता है या अतिवृष्टि ओलावृष्टि से कोई फसल खराब हो जाती है उसकी वजह से फसलों को नुकसान हो जाता है अगर फसल को नुकसान हो गया और किसान के पास पैसा नहीं आता तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा धक्का लगता है इस वजह से पूरे क्षेत्र में मांग की कमी हो जाती है और जो कंपनियां ग्रामीण क्षेत्र को अपने उत्पाद बेचते हैं उनके व्यवसाय में उस वर्ष कमी आने की संभावना पूर्ण रूप से बन जाती है
इसके साथ ही अगर मानसून अच्छा है और फसल का उत्पादन बहुत अच्छा हो जाता है उस दशा में फसल का दाम गिरने की संभावना बन जाती है और अगर फसल का दाम इतना ज्यादा गिर गया कि किसानों को उसकी कीमत भी नहीं मिली तब भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को धक्का लगता है इस स्थिति में दोनों ही तरफ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को देखना आवश्यक रहता है क्योंकि इसका कंपनियों के व्यवसाय पर सीधा सीधा प्रभाव पड़ता है
आज देश में उद्योगों का जाल बिछा हुआ है उसके बाद भी कृषि एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है क्योंकि कृषि पर बहुत अधिक जनसंख्या निर्भर करती है कृषि के साथ ही उससे जुड़े हुए अन्य उद्योग-धंधे जैसे डेरी उत्पादन मछली पालन लकड़ी व्यवसाय आदि भी जुड़े हुए हैं जिन पर भी इस उत्पादन का साथ ही मानसून का प्रभाव आता है तब इससे जुड़े हुए अन्य उद्योग भी उसी हिसाब से व्यवसाय में आगे या पीछे चले जाते हैं
इस चीज का एक उदाहरण अभी देखने को आया कि देश में दाल की कीमत देश में जब बहुत अधिक बढ़ गई तब सरकार ने विदेश से दाल के आयात की अनुमति दी और दाल की कीमत को नियंत्रित किया तब दाल का निर्यात करने वाली कंपनियों को नुकसान की संभावना बन सकती है
टमाटर की फसल के समय टमाटर का उत्पादन इतना अधिक हो जाता है कि वह बहुत सस्ता हो जाता है इस स्थिति में टमाटर से टोमेटो सॉस बनाने वाली कंपनियों के लिए फायदे का सौदा होता है
देश में आलू की कीमत कम रहने पर आलू के चिप्स और नमकीन बनाने वाली कंपनियां उसका भरपूर फायदा उठाती हैं
5. मुद्रास्फीति- कंपनी की कार्यप्रणाली व लाभ और हानि पर मुद्रास्फीति का भी प्रभाव बहुत जल्दी से पड़ता है
मुद्रास्फीति बढ़ने से कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि हो जाती है साथ ही मजदूरी और वेतन भी बढ़ाने पड़ते हैं जो कंपनी के खर्चे बढ़ाते हैं लेकिन इसके साथ ही मुद्रास्फीति बढ़ने से कंपनी के उत्पादन की मांग अगर बढ़ जाती है तो उसके लाभ में वृद्धि होती है और कंपनी उन्नति कर सकती है
6. मूल्य नियंत्रण - सरकारें कुछ चीजों के मूल्यों को निर्धारित करती हैं और उन्हें नियंत्रण में रखती हैं जैसे खाद्य पदार्थ दवाइयां आदि सरकार जब इन कंपनियों के उत्पादन पर मूल्य नियंत्रण की घोषणा करती है तब कंपनियों को उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है जिससे कंपनियों के लाभ में कमी आती है
7. अंतर्राष्ट्रीय वातावरण - जिन कंपनियों का व्यवसाय आयात और निर्यात से प्रभावित होता है उन कंपनियों के व्यवसाय पर अंतर्राष्ट्रीय वातावरण का भी प्रभाव पड़ता है आजकल सभी देशों का व्यापार एक दूसरे देश से बुरी तरह से जुड़ चुका है तो एक देश में होने वाली कोई भी घटना दूसरे देश को तुरंत प्रभावित करती है अगर कोई कंपनी निर्यात पर निर्भर है और वह जिस देश में निर्यात करती है वहां पर अगर उस माल की कीमत कम हो जाती है तो कंपनी के लाभ पर तुरंत प्रभाव पड़ता है जैसे पहले भारत का आईटी उद्योग बहुत ज्यादा लाभ की स्थिति में था लेकिन दूसरे विकासशील देशों में जब इस उद्योग ने जड़ जमाली तो भारत को कंपटीशन मिलने लगा और वहां भी सस्ती लागत होने की वजह से भारत के आईटी उद्योग में उतना लाभ नहीं बचा जो पहले था और कंपनियों के लाभ पर तुरंत प्रभाव पड़ने लगा
8. टेक्नोलॉजी बदलने का प्रभाव- आजकल व्यवसाय में यह एक अहम प्रभाव हो गया है आजकल व्यवसाई यह कहने लगे हैं कि अभी भारत में किसी भी व्यवसाय के बारे में यह नहीं पता चल रहा है कि कौन सा व्यवसाय कब तक हो सकता है इसका कारण यह है कि तकनीकी इतनी तेजी से बदल रही है कि आने वाली कोई भी नई तकनीकी पुरानी वाली तकनीक को पूरी तरह से बदल सकती है या खत्म कर सकती है जिससे जो कंपनी पुरानी तकनीक से काम कर रही है वह घाटे में जा सकती है इसलिए जो कंपनियां अपने व्यवसाय में टेक्नोलॉजी का उन्नयन नहीं कर रही है या रोज नई रिसर्च नहीं कर रही हैं उन्हें व्यवसाय में कभी भी परेशानी आ सकती है या कोई भी टेक्नोलॉजी देश में नहीं आ रही है जो किसी व्यवसाय को प्रभावित कर सकती है उससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में निवेश करने से पहले इस चीज का विशेष ध्यान रखना होता है
इसका एक सबसे बड़ा उदाहरण अभी आजकल देखने में आ रहा है जबसे कंप्यूटर की टेक्नोलॉजी देश में बड़ी है तब से बहुत सारे परिवर्तन आ चुके हैं जैसे टेलीकॉम सेक्टर में मोबाइल के बढ़ने से लैंडलाइन फोन का व्यवसाय पूरी तरह से खत्म हो चुका है जो लोग अभी भी लैंडलाइन फोन के बिजनेस में है वह कंपनियां घाटे में चली जा चुकी हैं
अभी हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बहुत ज्यादा जोर पकड़ रहा है ऐसा कहा जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी के डेवलप होने पर बहुत सारे काम मशीनों द्वारा होने लग जाएंगे जो अभी इंसानों द्वारा होते हैं तो जब यह तकनीकी मार्केट में आएगी तो किन-किन व्यवसाय ऊपर प्रभाव पड़ेगा उनकी कंपनियां भी इससे प्रभावित होंगी
List and link of blog
1. Investment in gold सोने में निवेश करें या नहीं
2.SIP निवेश करने से एक करोड़ कैसे बनाएं
3. company कंपनी क्या होती है
4. Bitcoin बिटकॉइन क्रिप्टो करेंसी क्या है
5.Preference share प्रेफरेंस शेयर शेयर क्या होते हैं
6. Bonus share बोनस शेयर क्या होते हैं
7.share-market-websites शेयर मार्केट की प्रमुख वेबसाइट
8.ways-to-convert-black-money-to-white. काले धन को सफेद करने के तरीके
9.Egold ई गोल्ड या पेपर बोर्ड क्या है
10. Auto sector boom in india ऑटो सेक्टर में तेजी का दौर चल रहा है
11. debenture डिबेंचर क्या होते हैं
12. convertible-debenture कन्वर्टिबल डिबेंचर क्या होते हैं और इनमें पैसा किस लिए लगाते हैं
13. how-to-invest-in-mutual-fund
14. types-of-mutual-fund
15.Why company issue debenture ऋण पत्र निकालने में कंपनी को क्या फायदा है
16.Investment-trick-about-company
17.शेयर मार्केट से दूर रहने का समय
18.volatile-share
19.Public ltd vs private ltd company
20.share
21.Sensex an nifty
22.stock-exchange
23.अगले दशक में कंपनियों के व्यवसाय को प्रभावित करने वाले कारक
24.कंपनी के व्यवसाय पर राजनीतिक और आर्थिक माहौल का प्रभाव
25. Sip-in-hindi
26.mutual-fund-in-hindi
27.Recurring-deposit
Main page
ReplyDelete